इंदौर। स्वच्छता के मामले में लगातार सात बार देश में नंबर-1 रहने वाले इंदौर शहर के माथे पर एक गहरा कलंक लग गया है। शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के सेवन से होने वाली मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को क्षेत्र के एक 62 वर्षीय बुजुर्ग की उपचार के दौरान मौत के बाद स्थानीय निवासियों ने दावा किया है कि पिछले एक महीने में यह 29वीं मौत है। जहाँ एक तरफ सरकारी रिकॉर्ड मौतों के आंकड़ों को कम बता रहे हैं, वहीं हर दूसरे घर में बिछा मातम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
भागीरथपुरा: एक ‘गैस चेंबर’ जैसी जल त्रासदी
भागीरथपुरा क्षेत्र की गलियों में इन दिनों सन्नाटा और दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम द्वारा आपूर्ति की जा रही पेयजल लाइन में सीवर का पानी मिल रहा है। पिछले कई हफ्तों से नलों से काला और बदबूदार पानी आ रहा है। इसे पीने के बाद लोग डायरिया, उल्टी-दस्त और पेट के गंभीर संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। बुधवार को जिस बुजुर्ग की मौत हुई, उन्हें भी पेट में तेज दर्द और लगातार उल्टियों के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन डॉक्टरों की लाख कोशिशों के बाद भी उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सरकारी आंकड़े बनाम जनता का दावा
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अब तक मौतों के आंकड़ों को लेकर बचाव की मुद्रा में है। आधिकारिक तौर पर केवल कुछ मौतों की ही पुष्टि दूषित पानी से हुई बताई जा रही है, जबकि अन्य मौतों को ‘पुरानी बीमारी’ या ‘प्राकृतिक कारण’ करार दिया जा रहा है। हालांकि, स्थानीय संघर्ष समिति का कहना है कि प्रशासन मौतों के आंकड़ों को छुपा रहा है ताकि शहर की ‘स्वच्छता रैंकिंग’ पर असर न पड़े। क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि “शव यात्राएं निकल रही हैं और अधिकारी अभी भी रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।”
आक्रोश की आग: सड़कों पर उतरे लोग
लगातार हो रही मौतों और प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आज भागीरथपुरा में जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और युवाओं ने खाली बर्तन लेकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने नगर निगम के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि “हमें अमृत महोत्सव के नाम पर जहर पिलाया जा रहा है।” लोगों का गुस्सा इस बात पर भी था कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद सीवर मिक्सिंग की समस्या को जड़ से खत्म नहीं किया गया।
हाई कोर्ट की फटकार और जांच के आदेश
इस मामले की गूंज अब मध्य प्रदेश हाई कोर्ट तक पहुँच गई है। कोर्ट ने स्थिति की भयावहता को देखते हुए इसे ‘मानवाधिकारों का उल्लंघन’ माना है। हाई कोर्ट ने रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। साथ ही, नगर निगम आयुक्त और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को फटकार लगाते हुए पूछा है कि आखिर इतनी मौतों के बाद भी जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई? कोर्ट ने उन सभी टेंडरों की जांच के भी निर्देश दिए हैं, जिनके तहत पाइपलाइन बिछाने का काम हुआ था।
ग्राउंड रिपोर्ट: अस्पतालों में कतारें
केवल भागीरथपुरा ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों जैसे पोलो ग्राउंड और संगम नगर में भी दूषित पानी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इंदौर के एमवाय अस्पताल (MYH) और जिला अस्पताल में हर रोज दर्जनों मरीज पेट दर्द और डिहाइड्रेशन की शिकायत लेकर पहुँच रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि ‘ई-कोली’ (E.coli) बैक्टीरिया की उपस्थिति के कारण यह संक्रमण जानलेवा साबित हो रहा है।
निष्कर्ष: स्वच्छता के दावों पर सवाल
इंदौर ने कचरा प्रबंधन में तो महारथ हासिल कर ली, लेकिन ‘नल से जल’ की गुणवत्ता बनाए रखने में वह विफल होता दिख रहा है। भागीरथपुरा की यह त्रासदी याद दिलाती है कि जब तक बुनियादी ढांचा (Infrastructure) दुरुस्त नहीं होगा, तब तक कोई भी रैंकिंग बेमानी है। अब देखना यह है कि क्या शासन पीड़ितों को उचित मुआवजा देगा और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी?






