इंदौर के भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में फैली भयावह जल त्रासदी ने न केवल शहर के स्वास्थ्य ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है। बुधवार, 21 जनवरी 2026 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (इंदौर खंडपीठ) में इस मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्वीकार किया कि क्षेत्र के नलकूपों (ट्यूबवेल) के पानी में घातक ‘E. Coli’ बैक्टीरिया मौजूद था। इस त्रासदी में अब तक 25 लोगों की जान जा चुकी है, जिसके बाद कोर्ट ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है।
क्या है ‘E. Coli’ और यह पानी में कैसे आया?
सरकार द्वारा पेश की गई लैब रिपोर्ट के अनुसार, पेयजल के नमूनों में मानव मल में पाए जाने वाले ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया की भारी मात्रा मिली है।
- सीवरेज और पेयजल लाइनों का मिलन: जांच में प्राथमिक तौर पर यह पाया गया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में पुरानी सीवरेज लाइनें लीक हो रही थीं। यह दूषित पानी रिसकर पेयजल सप्लाई वाली पाइपलाइनों और पास के सरकारी नलकूपों में मिल गया।
- प्रदूषित भूजल: लंबे समय तक लीकेज न सुधारे जाने के कारण क्षेत्र का भूजल (Groundwater) पूरी तरह संक्रमित हो गया, जिसे लोग बिना उबाले पी रहे थे।
हाई कोर्ट की सुनवाई और तल्ख टिप्पणियां
जस्टिस की खंडपीठ में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान, जब सरकारी वकील ने लैब रिपोर्ट पेश की, तो कोर्ट ने तीखे सवाल पूछे:
- “जिम्मेदारों पर हत्या का मुकदमा क्यों नहीं?”: कोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि जब विभाग को पता था कि लाइनें पुरानी हैं, तो समय पर ऑडिट क्यों नहीं किया गया? 25 लोगों की मौत को कोर्ट ने ‘सिस्टम द्वारा की गई हत्या’ के समान माना।
- न्यायिक जांच की मांग: याचिकाकर्ता के वकीलों ने तर्क दिया कि नगर निगम के अधिकारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों (लाइनमैन) को सस्पेंड कर अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। इस मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) होनी चाहिए ताकि कमिश्नर स्तर तक की जवाबदेही तय हो सके।
- मुआवजे पर असंतोष: कोर्ट ने सरकार द्वारा घोषित मुआवजे की राशि को अपर्याप्त बताते हुए पुनर्विचार करने को कहा है।
त्रासदी का प्रभाव: अब तक 25 मौतें
दिसंबर के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई इस त्रासदी ने धीरे-धीरे विकराल रूप ले लिया।
- लक्षण: मरीजों में लगातार उल्टियां, दस्त और पेट दर्द के लक्षण देखे गए। कई मरीजों की किडनी फेलियर के कारण मौत हुई।
- अस्पतालों की स्थिति: एमवाय अस्पताल (MY Hospital) और चोइथराम अस्पताल में अभी भी 50 से अधिक लोग भर्ती हैं, जिनमें से 10 की हालत नाजुक बताई जा रही है।
प्रशासन की अब तक की कार्रवाई
हाई कोर्ट में फटकार के बाद प्रशासन ने कुछ आपातकालीन कदम उठाए हैं:
- नलकूप सील: प्रभावित क्षेत्र के 12 सरकारी नलकूपों को तत्काल प्रभाव से कंक्रीट भरकर स्थायी रूप से बंद कर दिया गया है।
- नई पाइपलाइन: क्षेत्र में समानांतर रूप से नई एचडीपीई (HDPE) पाइपलाइन बिछाने का काम युद्ध स्तर पर शुरू किया गया है।
- टैंकर से सप्लाई: फिलहाल पूरे क्षेत्र में नगर निगम के टैंकरों के माध्यम से पानी भेजा जा रहा है, और लोगों को पानी उबालकर पीने की सख्त हिदायत दी गई है।
भविष्य की चुनौती: पूरे शहर का ‘वाटर ऑडिट’
इस घटना ने यह डर पैदा कर दिया है कि क्या शहर के अन्य पुराने इलाकों (जैसे राजवाड़ा, जूनी इंदौर और रावजी बाजार) में भी पेयजल लाइनें सुरक्षित हैं? विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जल्द ही पूरे शहर का ‘वाटर क्वालिटी ऑडिट’ नहीं हुआ, तो ऐसी त्रासदी दोबारा हो सकती है।
निष्कर्ष
इंदौर जल त्रासदी केवल एक बीमारी का प्रकोप नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का चरम है। हाई कोर्ट में सरकार द्वारा ‘E. Coli’ की मौजूदगी स्वीकार करना इस बात का सबूत है कि जनता को ‘स्वच्छ भारत’ के नाम पर दूषित पानी पिलाया जा रहा था। अब सबकी नजरें कोर्ट के अंतिम फैसले पर हैं, जो यह तय करेगा कि इन 25 मासूमों की मौत का असली जिम्मेदार कौन है।







