मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर सहित पूरे प्रदेश में बुधवार, 21 जनवरी 2026 को सरकारी कामकाज की रीढ़ माने जाने वाले पटवारियों ने सामूहिक अवकाश का ऐलान कर दिया। अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए पटवारियों ने आज ‘कलम बंद’ हड़ताल की, जिससे तहसील कार्यालयों और कलेक्टर कार्यालय में सन्नाटा पसरा रहा। इस एक दिवसीय सामूहिक अवकाश के कारण आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और राजस्व विभाग के सैकड़ों महत्वपूर्ण कार्य ठप हो गए।
हड़ताल का मुख्य कारण: वर्षों पुरानी मांगें और अनदेखी
मध्य प्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर की गई इस हड़ताल के पीछे मुख्य रूप से वेतन विसंगति और काम का भारी दबाव है। पटवारियों की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- ग्रेड पे में बढ़ोतरी: पटवारी लंबे समय से अपनी ग्रेड पे को 2100 से बढ़ाकर 2800 करने की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि काम की जटिलता और जिम्मेदारी के मुकाबले उनका वर्तमान वेतन बहुत कम है।
- संसाधनों का अभाव: पटवारियों का कहना है कि उन्हें डिजिटल कार्य (सारा ऐप, ई-केवाईसी) के लिए मजबूर किया जाता है, लेकिन सरकार ने न तो अच्छे लैपटॉप दिए हैं और न ही डेटा खर्च उपलब्ध कराया है।
- अतिरिक्त प्रभार: एक-एक पटवारी के पास 3 से 4 हल्का (क्षेत्र) का प्रभार है, जिससे वे मानसिक तनाव में हैं और समय पर काम पूरा नहीं हो पा रहा है।
- पदोन्नति (Promotion): कई पटवारी 20-25 वर्षों से एक ही पद पर कार्यरत हैं, उनके प्रमोशन की प्रक्रिया ठप पड़ी है।
इंदौर में व्यापक असर: जनता परेशान
इंदौर जिले की सभी तहसीलों (राऊ, देपालपुर, सांवेर, खुड़ैल और इंदौर शहर) में हड़ताल का शत-प्रतिशत असर देखा गया।
- फाइलों का अंबार: जमीन के नामांतरण (Mutation), सीमांकन (Demarcation) और बंटवारे से जुड़ी लगभग 1,500 से अधिक फाइलें आज आगे नहीं बढ़ सकीं।
- छात्रों को दिक्कत: जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र और मूल निवासी प्रमाण-पत्र के सत्यापन (Verification) के लिए तहसील पहुंचे छात्रों को खाली हाथ लौटना पड़ा। चूंकि पटवारी की रिपोर्ट के बिना ये प्रमाण-पत्र नहीं बनते, इसलिए छात्रों का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हुआ।
- कलेक्टर कार्यालय में विरोध: इंदौर कलेक्टर कार्यालय के बाहर पटवारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और अपनी मांगों का ज्ञापन प्रशासन को सौंपा।
डिजिटल कार्य का बहिष्कार
पटवारियों ने केवल कार्यालयीन कार्य ही नहीं, बल्कि सरकार के महत्वाकांक्षी ‘डिजिटल क्रॉप सर्वे’ और PM किसान निधि के सत्यापन कार्य का भी पूरी तरह बहिष्कार किया है। पटवारियों का कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा और वेतन की मांगें पूरी नहीं होतीं, वे निजी मोबाइल से सरकारी ऐप्स का उपयोग नहीं करेंगे।
सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया
राजस्व विभाग के उच्च अधिकारियों ने पटवारी संघ को वार्ता के लिए बुलाया है, लेकिन संघ का कहना है कि वे अब केवल ‘आश्वासन’ से नहीं मानेंगे। इंदौर कलेक्टर ने तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को स्थिति संभालने के निर्देश दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर पटवारी के बिना काम का होना नामुमकिन साबित हो रहा है।
भविष्य की चेतावनी
पटवारी संघ के जिला अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि 26 जनवरी तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है। यदि ऐसा होता है, तो मध्य प्रदेश की पूरी राजस्व व्यवस्था चरमरा सकती है, जिसका सीधा असर सरकारी खजाने और आम जनता पर पड़ेगा।
निष्कर्ष
पटवारियों का सामूहिक अवकाश शासन और जनता के बीच की उस कड़ी के टूटने जैसा है, जो सीधे जमीन और किसान से जुड़ी है। जहां पटवारियों की मांगें जायज प्रतीत होती हैं, वहीं इस हड़ताल से आम आदमी का पिसना चिंताजनक है। सरकार को जल्द ही बीच का रास्ता निकालना होगा ताकि राजस्व कार्य दोबारा पटरी पर लौट सकें।







