इंदौर, जिसे भारत का सबसे स्वच्छ शहर और ‘मिनी बॉम्बे’ कहा जाता है, समय-समय पर अपनी अजीबोगरीब खबरों के लिए चर्चा में रहता है।
लेकिन हाल ही में इंदौर के सराफा बाजार से सामने आए एक मामले ने न केवल प्रशासन को बल्कि आम जनता को भी हैरत में डाल दिया है। यह कहानी मांगीलाल नामक एक ऐसे व्यक्ति की है, जिसे दुनिया एक लाचार दिव्यांग भिखारी समझती थी, लेकिन जांच में वह करोड़ों की संपत्ति का मालिक निकला।
कैसे हुआ खुलासा?
इंदौर नगर निगम और जिला प्रशासन ने शहर को ‘भिक्षुक मुक्त’ (Beggar-Free City) बनाने के लिए एक विशेष अभियान चला रखा है। इसी अभियान के तहत सामाजिक न्याय विभाग की टीम शहर के प्रमुख बाजारों और चौराहों से भिक्षुओं का रेस्क्यू कर उन्हें पुनर्वास केंद्र भेज रही थी।
जब टीम इंदौर के प्रसिद्ध सराफा बाजार पहुँची, तो वहां वर्षों से भीख मांग रहे मांगीलाल को पकड़ा गया। मांगीलाल शारीरिक रूप से दिव्यांग है और दशकों से इसी इलाके में भीख मांग कर अपना गुजारा करता था। शुरुआती पूछताछ में उसने खुद को बेहद गरीब बताया, लेकिन जब प्रशासन ने उसकी पृष्ठभूमि की जांच की और उसके पास मौजूद दस्तावेजों को खंगाला, तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।
अकूत संपत्ति का मालिक
जांच में जो तथ्य सामने आए, वे किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं हैं। मांगीलाल के पास से मिले दस्तावेजों और बैंक डिटेल्स से पता चला कि वह कोई साधारण भिखारी नहीं, बल्कि एक संपन्न व्यक्ति है:
- आलीशान मकान: मांगीलाल के पास इंदौर के रिहायशी इलाकों में तीन पक्के मकान हैं। इनमें से एक मकान काफी बड़ा और आधुनिक सुविधाओं से लैस है।
- वाहनों का काफिला: जिसे लोग सड़क पर घिसटते हुए देखते थे, उसके पास निजी इस्तेमाल के लिए एक लग्जरी कार और तीन पैसेंजर ऑटो हैं। ये ऑटो उसने किराए पर चला रखे थे, जिनसे उसे हर महीने मोटी कमाई होती थी।
- ब्याज का कारोबार: जांच में यह भी पता चला कि भीख से मिले पैसों को वह खाली नहीं रखता था। वह बाजार के छोटे व्यापारियों और जरूरतमंदों को ऊंचे ब्याज पर पैसे उधार (सूदखोरी) देता था।
- बैंक बैलेंस: उसके बैंक खातों में लाखों रुपये जमा होने की पुष्टि हुई है।
भीख मांगना: पेशा या मजबूरी?
सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि इतनी संपत्ति होने के बाद भी वह भीख क्यों मांग रहा था? पूछताछ में यह बात सामने आई कि मांगीलाल के लिए भीख मांगना अब मजबूरी नहीं, बल्कि एक ‘आसान पेशा’ बन चुका था। सराफा बाजार जैसे व्यस्त और समृद्ध इलाके में लोग धार्मिक आस्था और दया के वशीभूत होकर दिल खोलकर दान देते हैं। मांगीलाल ने अपनी दिव्यांगता का फायदा उठाकर लोगों की इसी सहानुभूति को अपनी कमाई का जरिया बना लिया था।
वह रोजाना सुबह अपने घर से निकलता और दिन भर भीख मांगकर हजारों रुपये इकट्ठा करता था। शाम को वह एक सामान्य समृद्ध व्यक्ति की तरह अपना जीवन जीता था। उसके परिवार के सदस्य भी उसकी इस सच्चाई से वाकिफ थे, लेकिन इतनी अधिक और आसान कमाई के कारण किसी ने उसे नहीं रोका।
प्रशासन की कार्रवाई और सामाजिक संदेश
प्रशासन ने मांगीलाल को भिक्षुक पुनर्वास केंद्र भेज दिया है और उसकी अवैध संपत्ति तथा ब्याज के कारोबार की जांच शुरू कर दी है। कलेक्टर के निर्देशानुसार, यह पता लगाया जा रहा है कि क्या उसने भीख के माध्यम से मनी लॉन्ड्रिंग या टैक्स चोरी जैसे अपराध किए हैं।
यह मामला समाज के लिए एक बड़ा सबक है:
- सजगता की कमी: हम अक्सर बिना सोचे-समझे सड़कों पर दान देते हैं, जो वास्तव में जरूरतमंदों तक न पहुँचकर ऐसे पेशेवर गिरोहों या अमीरों के पास चला जाता है।
- सरकारी अभियान की जरूरत: इंदौर प्रशासन का यह कदम साबित करता है कि भिक्षुक मुक्ति अभियान केवल दिखावा नहीं, बल्कि शहर की सामाजिक और आर्थिक सफाई के लिए आवश्यक है।
इंदौर का यह ‘करोड़पति भिखारी’ आज पूरे देश में चर्चा का विषय है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि हर फटे हाल दिखने वाला व्यक्ति लाचार नहीं होता और दान देने से पहले हमें पात्र की पहचान करना बेहद जरूरी है।







