इंदौर पुलिस की क्राइम ब्रांच ने शहर के रसूखदारों और ट्रैवल संचालकों को निशाना बनाने वाले एक हाई-प्रोफाइल ‘लग्जरी कार हेराफेरी’ गिरोह का पर्दाफाश किया है। यह गिरोह ओएलएक्स (OLX) और अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए महंगी कारें किराए पर लेता था और बाद में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर उन्हें अन्य राज्यों में बेच देता था या गिरवी रख देता था।
पुलिस ने इस गिरोह के कब्जे से बीएमडब्ल्यू (BMW), ऑडी (Audi), मर्सिडीज (Mercedes) और फॉर्च्यूनर (Fortuner) जैसी करीब 10 लग्जरी कारें बरामद की हैं, जिनकी बाजार में कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।
कैसे काम करता था यह शातिर गिरोह?
इंदौर पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में गिरोह के काम करने के अनोखे तरीके (Modus Operandi) का खुलासा हुआ है:
- भरोसा जीतना: गिरोह के सदस्य खुद को बड़े बिजनेसमैन या इवेंट ऑर्गेनाइजर बताकर ट्रैवल एजेंसियों और निजी कार मालिकों से संपर्क करते थे। वे शुरुआत में भारी किराया और एडवांस देकर मालिकों का भरोसा जीत लेते थे।
- फर्जी एग्रीमेंट: कार लेते समय वे फर्जी आधार कार्ड और रेंट एग्रीमेंट का उपयोग करते थे।
- जीपीएस (GPS) से छेड़छाड़: कार हाथ में आते ही गिरोह के तकनीकी एक्सपर्ट सबसे पहले गाड़ी में लगे जीपीएस ट्रैकर को निष्क्रिय कर देते थे या उसे किसी ट्रक या बस में लगा देते थे ताकि मालिक को लगे कि कार अभी भी रास्ते पर है।
धोखाधड़ी का ‘मास्टर प्लान’: दिल्ली और हरियाणा में बिक्री
जब मालिक को शक होता और वह कार वापस मांगता, तब तक गिरोह कार के चेसिस नंबर और इंजन नंबर के साथ छेड़छाड़ कर चुका होता था।
- फर्जी आरसी (RC) निर्माण: गिरोह के पास ऐसे जालसाज थे जो हूबहू असली जैसी दिखने वाली ‘डुप्लीकेट आरसी’ तैयार कर लेते थे।
- दूसरे राज्यों में सप्लाई: इन कारों को इंदौर से बाहर दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के बाजारों में कम कीमत पर बेच दिया जाता था। कई बार इन कारों का इस्तेमाल तस्करी जैसे अवैध कामों में भी किया जाता था ताकि पकड़े जाने पर असली मालिक फंसे।
पुलिस की कार्रवाई: फिल्मी अंदाज में घेराबंदी
एक पीड़ित कार मालिक की शिकायत के बाद क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाया। पुलिस ने एक ‘छद्म ग्राहक’ (Dummy Customer) बनकर गिरोह से संपर्क किया और एक लग्जरी कार खरीदने का सौदा किया।
- छापेमारी: जैसे ही गिरोह के सदस्य कार की डिलीवरी देने के लिए इंदौर के बायपास इलाके में पहुंचे, पुलिस ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
- गिरफ्तारी: मौके से गिरोह के मास्टरमाइंड सहित 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के पास से दर्जनों फर्जी सिम कार्ड, मोहरें और आरसी बनाने के उपकरण बरामद हुए हैं।
इंदौर पुलिस की अपील: कार किराए पर देते समय बरतें सावधानी
इस बड़े खुलासे के बाद इंदौर पुलिस ने वाहन मालिकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की है:
- सत्यापन अनिवार्य: किसी को भी गाड़ी किराए पर देने से पहले उसके दस्तावेजों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं।
- एडवांस तकनीक: केवल एक जीपीएस पर भरोसा न करें, बल्कि गुप्त स्थानों पर ‘हिडन ट्रैकर्स’ का उपयोग करें।
- अनजान से बचें: सोशल मीडिया या अनधिकृत ऐप के जरिए होने वाले सौदों से बचें।
निष्कर्ष: बड़ा नेटवर्क होने की आशंका
पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोहों से जुड़े हैं। पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने पिछले छह महीनों में इंदौर और भोपाल से 20 से अधिक कारें गायब की हैं। 3 करोड़ की रिकवरी तो महज शुरुआत है; पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और भी महंगी गाड़ियाँ और बड़े नाम सामने आएंगे।
यह कार्रवाई इंदौर पुलिस की सतर्कता और ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का प्रमाण है, जिसने शहर के कार मालिकों को एक बड़ी आर्थिक चपत लगने से बचा लिया।







