इंदौर/धार: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक और विवादित भोजशाला परिसर में कल, 23 जनवरी को मनाए जाने वाले बसंत पंचमी पर्व को लेकर प्रशासन ने अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम किए हैं। इस वर्ष बसंत पंचमी का शुक्रवार को पड़ना सुरक्षा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन हिंदू समाज द्वारा सरस्वती पूजा और मुस्लिम समुदाय द्वारा जुमे की नमाज, दोनों का समय टकराने की स्थिति बनती है। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इंदौर संभाग के कमिश्नर और आईजी ने खुद मोर्चा संभाल लिया है।
ड्रोन और विमानों के लिए ‘नो-फ्लाई जोन’
सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता देते हुए प्रशासन ने भोजशाला परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील इलाकों को ‘नो-फ्लाई जोन’ (No-Fly Zone) घोषित कर दिया है। इसका अर्थ है कि बिना अनुमति के इस क्षेत्र में कोई भी ड्रोन, निजी हेलिकॉप्टर या रिमोट से चलने वाले खिलौने नहीं उड़ाए जा सकेंगे। पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसी भी नागरिक या संस्था द्वारा नियमों का उल्लंघन कर ड्रोन उड़ाया गया, तो उसे तुरंत मार गिराया जाएगा और संबंधित व्यक्ति पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
6000 जवानों की तैनाती और हाई-टेक निगरानी
शांति व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए धार जिले के अलावा इंदौर, उज्जैन और अन्य जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया है। लगभग 6000 पुलिस अधिकारी और जवान चप्पे-चप्पे पर तैनात किए गए हैं। इनमें रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और विशेष सशस्त्र बल (SAF) की टुकड़ियां भी शामिल हैं।
परिसर के अंदर और बाहर 150 से अधिक हाई-डेफिनिशन CCTV कैमरे लगाए गए हैं, जिनकी लाइव मॉनिटरिंग एक विशेष कंट्रोल रूम से की जा रही है। साथ ही, सादे कपड़ों में भी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि असामाजिक तत्वों पर पैनी नजर रखी जा सके।
क्यों संवेदनशील है इस बार की बसंत पंचमी?
भोजशाला में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के नियमानुसार, सामान्य दिनों में मंगलवार को हिंदुओं को पूजा करने और शुक्रवार को मुस्लिमों को नमाज पढ़ने की अनुमति होती है। लेकिन जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ती है, तो दोनों समुदायों के लिए समय का प्रबंधन एक बड़ी चुनौती बन जाता है। हालांकि, प्रशासन ने दोनों पक्षों से संवाद कर समय निर्धारित कर दिया है, फिर भी किसी भी प्रकार के तनाव को रोकने के लिए किलेबंदी की गई है।
प्रवेश के लिए विशेष गाइडलाइंस
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रवेश और निकास के रास्ते अलग-अलग बनाए गए हैं। दर्शनार्थियों को मोबाइल फोन, थैले या किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद ही प्रवेश दिया जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों पर भी बैरिकेडिंग की गई है और बाहरी वाहनों के प्रवेश को शहर की सीमा पर ही नियंत्रित किया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर सख्त नजर
इंदौर और धार पुलिस की साइबर सेल सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसे व्हाट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर सक्रिय है। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार की भड़काऊ पोस्ट या अफवाह पर ध्यान न दें और न ही उन्हें फॉरवर्ड करें। ग्रुप एडमिन्स को विशेष रूप से सतर्क रहने की हिदायत दी गई है।
निष्कर्ष
भोजशाला में बसंत पंचमी का उत्सव आस्था और प्रशासन के लिए परीक्षा, दोनों का संगम है। ‘नो-फ्लाई जोन’ और भारी पुलिस बल की मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार किसी भी कीमत पर शहर की सांप्रदायिक सद्भावना को बिगड़ने नहीं देना चाहती। इंदौर संभाग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में दर्शन कर सकेंगे।







