इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दिसंबर 2025 के अंत में शुरू हुई दूषित जल त्रासदी ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। देश के सबसे स्वच्छ शहर का गौरव रखने वाले इंदौर के लिए यह घटना एक काला धब्बा बन गई है। हाल ही में एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज की विशेष ऑडिट कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसने इस त्रासदी की भयावहता पर मुहर लगा दी है।
ऑडिट रिपोर्ट का मुख्य खुलासा: 15 मौतों की पुष्टि
भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले कुछ हफ्तों में हुई मौतों की जांच के लिए गठित 5 डॉक्टरों की कमेटी ने अपनी रिपोर्ट कलेक्टर को सौंपी है।
- 21 मामलों की जांच: कमेटी ने क्षेत्र में हुई कुल 21 मौतों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया।
- सीधा संबंध: ऑडिट में पुष्टि की गई कि इन 21 में से 15 मौतों का सीधा कारण दूषित पानी से फैला संक्रमण (उल्टी-दस्त और डायरिया) था।
- विवादित आंकड़े: प्रशासन अब तक मौतों का आधिकारिक आंकड़ा 6 से 8 के बीच बता रहा था, लेकिन इस विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है।
त्रासदी का कारण: पाइपलाइनों का जानलेवा संगम
जांच में पाया गया कि भागीरथपुरा एक पुरानी बस्ती है, जहाँ पीने के पानी की पाइपलाइनें और सीवेज (गंदे पानी) की लाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब से गुजरती हैं।
- लीकेज और संक्रमण: दशकों पुरानी पाइपलाइनों में हुए लीकेज के कारण सीवेज का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया।
- खतरनाक बैक्टीरिया: लैब रिपोर्ट में पानी के नमूनों में ई-कोलाई (E. coli) और शिगेला (Shigella) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए, जो आमतौर पर मानव मल में मौजूद होते हैं। इन्हीं बैक्टीरिया ने लोगों के शरीर में पहुँचकर अंगों को फेल (Multiple Organ Failure) करना शुरू कर दिया।
संक्रमण का पैमाना और मानवीय क्षति
यह त्रासदी कितनी बड़ी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि:
- प्रभावित लोग: 29 दिसंबर 2025 से अब तक लगभग 2800 से 3000 लोग इस संक्रमण की चपेट में आए।
- अस्पताल में भर्ती: 430 से अधिक मरीजों को गंभीर हालत में अस्पतालों में भर्ती करना पड़ा, जिनमें 5 महीने के मासूम बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक शामिल थे। वर्तमान में भी कई मरीज आईसीयू (ICU) में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
मुआवजे और राजनीतिक हलचल
- मुआवजा: मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की है। 15 चिन्हित परिवारों को यह राशि मिल चुकी है, जबकि अन्य दावों की जांच जारी है।
- विपक्ष का हमला: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे “सरकारी नरसंहार” करार दिया है। राहुल गांधी और अन्य बड़े नेताओं का दौरा प्रस्तावित है, जो इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।
हाईकोर्ट और प्रशासन की सख्ती
इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को तलब किया है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि सरकार की ‘स्टेटस रिपोर्ट’ और जमीनी हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। नगर निगम के कई अधिकारियों पर गाज गिर चुकी है और भविष्य में ‘क्रॉस-कंटामिनेशन’ रोकने के लिए पूरे शहर की पाइपलाइनों के ऑडिट के निर्देश दिए गए हैं।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा की यह घटना सबक है कि केवल सतही सफाई ही काफी नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे दबे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का आधुनिक होना भी उतना ही जरूरी है। 15 जिंदगियों का जाना किसी तकनीकी खराबी का नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम है।






