इंदौर (मध्य प्रदेश): स्वच्छता के मामले में लगातार सात बार देश में नंबर वन रहने वाले इंदौर शहर में इस समय एक गंभीर स्वास्थ्य आपातकाल (Public Health Emergency) जैसी स्थिति बनी हुई है। शहर के भागीरथपुरा और आसपास के इलाकों में दूषित पानी के सेवन से अब तक 18 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। इस घटना ने न केवल प्रशासनिक तंत्र की पोल खोल दी है, बल्कि ‘स्वच्छ इंदौर’ के दावों पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर निगम कमिश्नर को हटाने और कई वरिष्ठ अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश दिए हैं।
भागीरथपुरा बना त्रासदी का केंद्र
यह पूरी घटना इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र से शुरू हुई, जहाँ दिसंबर के अंतिम सप्ताह से ही निवासियों ने नलों से आने वाले पानी में दुर्गंध और कड़वे स्वाद की शिकायत की थी। प्रशासन द्वारा समय पर कार्रवाई न किए जाने के कारण स्थिति बिगड़ती गई और नए साल के शुरुआती हफ्ते में उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन के मरीजों की बाढ़ आ गई। लैब रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिल गया था, जिससे पानी में ई-कोलाई (E. coli) और फीकल कोलीफॉर्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया पनप गए। इन बैक्टीरिया के कारण लोगों को गंभीर संक्रमण हुआ, जो कई बुजुर्गों और बच्चों के लिए जानलेवा साबित हुआ।
प्रशासनिक विफलता और हाईकोर्ट की फटकार
इस त्रासदी के बाद मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि “स्वच्छ शहर का तमगा केवल सड़कों की सफाई से नहीं, बल्कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने से सार्थक होता है।” ऑडिट रिपोर्ट (CAG) के चौंकाने वाले आंकड़ों में सामने आया है कि इंदौर में पीने के पानी की सप्लाई का लगभग 65% हिस्सा पाइपलाइनों में लीकेज और बर्बादी के कारण दूषित हो रहा है। लीकेज की मरम्मत में महीनों की देरी और सीवेज लाइनों के साथ पेयजल लाइनों का होना इस त्रासदी का मुख्य कारण माना जा रहा है।
राजनीतिक घमासान और मुआवजा
इस मुद्दे ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को घेरते हुए इसे ‘आपराधिक लापरवाही’ करार दिया है। विपक्ष ने मृतकों के परिजनों के लिए 1 करोड़ रुपये के मुआवजे और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, सरकार ने मृतकों के परिवारों को 2-2 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। शहर भर में नगर निगम के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग अब नगर निगम के पानी पर भरोसा करने के बजाय बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।
स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम की वर्तमान कार्रवाई
वर्तमान में इंदौर कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित इलाकों में घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। भागीरथपुरा में 60 से अधिक पानी के सैंपल लिए गए थे, जिनमें से 35 सैंपल फेल पाए गए हैं। नगर निगम ने पुरानी पाइपलाइनों को काटकर नई लाइनें बिछाने का काम शुरू किया है और प्रभावित क्षेत्रों में टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई की जा रही है। साथ ही, अस्पतालों में डॉक्टरों की छुट्टियां निरस्त कर दी गई हैं ताकि डायरिया के प्रकोप को नियंत्रित किया जा सके।
मौसम और वायु प्रदूषण का दोहरा वार
एक तरफ इंदौर जल संकट से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ कड़ाके की ठंड और प्रदूषण ने भी शहरवासियों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आज इंदौर का न्यूनतम तापमान 11°C के आसपास रिकॉर्ड किया गया है, जबकि सुबह घना कोहरा देखा गया। चिंताजनक बात यह है कि इंदौर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 234 तक पहुंच गया है, जिसे ‘अस्वास्थ्यकर’ श्रेणी में रखा जाता है। स्वास्थ्य विभाग ने दूषित पानी के साथ-साथ खराब हवा से बचने के लिए मास्क पहनने और पानी उबालकर पीने की सलाह दी है।








