मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी और देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर पर ‘दूषित जल कांड’ का काला साया गहराता जा रहा है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से फैलने वाली बीमारी (संभावित हैजा और गैस्ट्रोएंटेराइटिस) ने अब तक 23 लोगों की जान ले ली है।
यह घटना केवल एक स्वास्थ्य संकट नहीं रह गई है, बल्कि इसने प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा तूफान खड़ा कर दिया है। जहाँ एक ओर जनता अपनों को खोने के गम में डूबी है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी का दौर जारी है।
भागीरथपुरा की त्रासदी: मौत का तांडव
पिछले एक सप्ताह से भागीरथपुरा की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है, जो समय-समय पर एम्बुलेंस के सायरन और पीड़ित परिवारों के रोने की आवाज से टूटता है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मौत का आंकड़ा बढ़कर 23 हो गया है, जबकि 150 से अधिक लोग अभी भी शहर के एमवाई (MY) अस्पताल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती हैं।
त्रासदी का मुख्य कारण:
प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि क्षेत्र की पेयजल पाइपलाइनें कई जगह से क्षतिग्रस्त थीं। इन पाइपलाइनों के बगल से गुजरने वाली सीवेज लाइन का गंदा पानी लीकेज के कारण पीने के पानी में मिल गया। जब लोगों ने यह ‘जहरीला’ पानी पिया, तो उन्हें उल्टी-दस्त और पेट में तेज दर्द की शिकायत हुई, जो अंततः कई लोगों के लिए जानलेवा साबित हुई।
सुमित्रा महाजन की व्यथा: “इंदौर के माथे पर कलंक”
इंदौर की पूर्व सांसद और पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) ने इस घटना पर गहरी संवेदना और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने अपनी व्यथा जताते हुए कहा कि इंदौर जैसे शहर में, जो स्वच्छता में सात बार से नंबर-1 है, ऐसी घटना होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने प्रशासन की जवाबदेही पर सवाल उठाते हुए कहा, “हमें केवल सफाई के पुरस्कारों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। यह घटना हमारे सिस्टम की बड़ी विफलता है।”
मुख्यमंत्री का वार: “लाशों पर राजनीति कर रही कांग्रेस”
जैसे ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पीड़ितों से मिलने का दौरा किया और सरकार को घेरा, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कड़ा पलटवार किया। मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर ‘लाशों पर राजनीति’ करने का आरोप लगाया है।
सरकार का पक्ष:
- मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने घटना के तुरंत बाद वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड किया है और प्रभावित परिवारों को सहायता राशि दी जा रही है।
- उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मानवीय त्रासदी का उपयोग केवल राजनीतिक लाभ लेने और शहर की छवि खराब करने के लिए कर रहा है।
- सरकार ने पूरे क्षेत्र में नई पाइपलाइन बिछाने के लिए आपातकालीन बजट स्वीकृत कर दिया है।
प्रशासनिक लापरवाही की पराकाष्ठा
यह घटना नगर निगम के उन दावों पर सवाल उठाती है जिनमें कहा जाता है कि शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर विश्व स्तरीय है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे तीन महीने से गंदा और बदबूदार पानी आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे सामान्य बताकर टाल दिया। यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती, तो इन 23 लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
आगे की राह और चुनौतियां
इंदौर नगर निगम के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती पूरे शहर की पाइपलाइनों का ‘वाटर ऑडिट’ करना है।
- पुरानी पाइपलाइनों को बदलना: पुरानी बस्तियों में सालों पुरानी सीमेंट की पाइपलाइनों को तत्काल बदलना होगा।
- वॉटर टेस्टिंग: नियमित अंतराल पर पानी के नमूनों की रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच अनिवार्य करनी होगी।
- स्वास्थ्य शिविर: भागीरथपुरा और आसपास के क्षेत्रों में अगले 15 दिनों तक निरंतर स्वास्थ्य शिविर लगाने की आवश्यकता है ताकि संक्रमण को आगे फैलने से रोका जा सके।
निष्कर्ष
भागीरथपुरा की यह त्रासदी इंदौर के लिए एक बहुत बड़ा सबक है। राजनीति से ऊपर उठकर, प्राथमिकता उन परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की होनी चाहिए। स्वच्छता का ताज तब तक अधूरा है, जब तक शहर के हर नागरिक को पीने के लिए शुद्ध और सुरक्षित पानी न मिले।








