महू में जलजनित बीमारियों का ‘तांडव’: इंदौर के बाद अब पट्टी बाजार में हड़कंप, 25 से ज्यादा बीमार; प्रशासन ने तैनात किए अस्थायी अस्पताल

मध्य प्रदेश के व्यावसायिक केंद्र इंदौर में दूषित पानी से मची तबाही के बाद, अब पास के ही सैन्य छावनी क्षेत्र महू (Dr. Ambedkar Nagar) से डराने वाली खबरें आ रही हैं। महू के घनी आबादी वाले पट्टी बाजार इलाके में जलजनित बीमारियों (Waterborne Diseases) ने पैर पसार लिए हैं। पिछले 48 घंटों में यहाँ हेपेटाइटिस (पीलिया का गंभीर रूप) और गैस्ट्रोएंटेराइटिस के 25 से अधिक मामले सामने आए हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इलाके को ‘रेड जोन’ घोषित कर दिया है और युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।

पट्टी बाजार: बीमारी का केंद्र और दहशत का माहौल

महू का पट्टी बाजार इलाका अपनी संकरी गलियों और पुरानी पाइपलाइनों के लिए जाना जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से नलों में आने वाले पानी का रंग मटमैला था और उसमें दुर्गंध आ रही थी।

  • मरीजों की संख्या: बीमारों में सबसे अधिक संख्या बच्चों और बुजुर्गों की है। 25 से अधिक लोग अब तक अस्पताल पहुँच चुके हैं, जिनमें से 8 की स्थिति गंभीर बताई जा रही है।
  • लक्षण: मरीजों में तेज बुखार, उल्टियां, पेट दर्द और आंखों व त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर हेपेटाइटिस-ए की ओर इशारा कर रहे हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी: गलियों में ‘अस्थायी अस्पताल’

इंदौर की त्रासदी से सबक लेते हुए प्रशासन ने इस बार देरी नहीं की। कलेक्टर के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने पट्टी बाजार के सामुदायिक भवन और एक स्थानीय स्कूल में अस्थायी चिकित्सा शिविर (Field Hospital) स्थापित कर दिए हैं।

  1. ऑन-द-स्पॉट इलाज: गंभीर मरीजों को तुरंत महू के सिविल अस्पताल और इंदौर के एमवाय (MY) अस्पताल रेफर किया जा रहा है, जबकि सामान्य लक्षण वाले मरीजों का इलाज इन्हीं अस्थायी केंद्रों में किया जा रहा है।
  2. घर-घर स्क्रीनिंग: स्वास्थ्य विभाग की 10 टीमें घर-घर जाकर सर्वे कर रही हैं। हर घर में क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं और लोगों को पानी उबालकर पीने की सख्त हिदायत दी गई है।
  3. सैंपल जांच: लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) ने इलाके के 15 अलग-अलग बिंदुओं से पानी के नमूने लिए हैं ताकि संक्रमण के सटीक स्रोत का पता लगाया जा सके।

दूषित पानी का कारण: पुरानी पाइपलाइन और ड्रेनेज का मिलन

प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि पट्टी बाजार की पुरानी पाइपलाइन कई जगहों से क्षतिग्रस्त हो गई है। जमीन के भीतर सीवरेज (ड्रेनेज) की लाइन और पीने के पानी की लाइन के समानांतर होने के कारण, लीकेज के जरिए मलजल (Sewage) पीने के पानी में मिल गया।

यह बिल्कुल वैसी ही लापरवाही है जैसी इंदौर के उन इलाकों में देखी गई थी जहाँ हाल ही में कई मौतें हुईं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि उन्होंने नगर परिषद को कई बार लीकेज की शिकायत की थी, लेकिन अधिकारियों ने इसे अनसुना कर दिया।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और चेतावनी

एसडीएम महू ने जल आपूर्ति विभाग के संबंधित इंजीनियरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही, इलाके के सभी निजी बोरिंग और सार्वजनिक कुओं को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया गया है।

  • टैंकर से सप्लाई: जब तक पाइपलाइन की मरम्मत नहीं हो जाती, तब तक पूरे क्षेत्र में नगर परिषद के टैंकरों के माध्यम से ‘क्लोरीन युक्त’ सुरक्षित पानी की सप्लाई की जा रही है।
  • जांच कमेटी: एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया है जो यह जांच करेगी कि क्या क्षेत्र में चल रही किसी अवैध डेरी या कारखाने का वेस्ट तो पानी की लाइन में नहीं मिल रहा है।

निष्कर्ष: सबक लेने का समय

महू में बीमारियों का यह तांडव एक बार फिर हमारे शहरी बुनियादी ढांचे की जर्जर स्थिति को उजागर करता है। इंदौर के बाद महू की यह घटना पूरे जिले के लिए एक चेतावनी है। प्रशासन भले ही अब ‘अस्थायी अस्पताल’ बनाकर सक्रिय दिख रहा हो, लेकिन असल समाधान पुरानी और असुरक्षित पाइपलाइनों को बदलने में ही है।

जनता को भी इस समय अत्यधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यदि आपके आसपास पानी की गुणवत्ता में कोई भी बदलाव दिखे, तो उसे अनदेखा न करें।

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