इंदौर: मिनी मुंबई कहे जाने वाले हमारे इंदौर में ट्रैफिक की समस्या को सुलझाने के लिए बनाया गया BRTS (Bus Rapid Transit System) एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार, 24 जनवरी 2026 से नगर निगम और इंदौर ट्रैफिक पुलिस ने एक संयुक्त अभियान शुरू किया है, जिसके तहत BRTS कॉरिडोर के भीतर अवैध रूप से प्रवेश करने वाले दुपहिया वाहनों पर अब तक की सबसे सख्त कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से साकेत से पलासिया के बीच के हिस्से को ‘जीरो टॉलरेंस ज़ोन’ घोषित कर दिया गया है।
क्यों पड़ी सख्ती की जरूरत?
इंदौर का BRTS कॉरिडोर केवल ‘आई-बस’ (i-Bus) के निर्बाध संचालन के लिए बनाया गया था। लेकिन पिछले कुछ महीनों से देखा जा रहा है कि आम ट्रैफिक से बचने के चक्कर में दुपहिया वाहन चालक अपनी जान जोखिम में डालकर इस कॉरिडोर में घुस रहे हैं। इससे न केवल आई-बस की रफ्तार धीमी हो रही है, बल्कि कॉरिडोर के भीतर भीषण दुर्घटनाओं का ग्राफ भी बढ़ा है।
हाल ही में हुई कुछ दुर्घटनाओं और आई-बस चालकों की शिकायतों के बाद प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है। पुलिस का कहना है कि लोग ग्रिल के कटे हुए हिस्सों या बस स्टॉप के पास के एंट्री पॉइंट से अंदर घुस जाते हैं, जो खतरनाक है।
साकेत से पलासिया: कार्रवाई का मुख्य केंद्र
आज सुबह से ही साकेत चौराहे, गीता भवन और पलासिया के बीच ट्रैफिक पुलिस की कई टीमें तैनात की गई हैं। इस पैच को इसलिए चुना गया है क्योंकि यहाँ कोचिंग संस्थानों और ऑफिसों की भारी संख्या के कारण युवाओं द्वारा कॉरिडोर का सबसे ज्यादा उल्लंघन किया जाता है।
- चेकिंग पॉइंट्स: पुलिस ने आई-बस स्टॉप के पास बैरिकेडिंग की है।
- इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS): न केवल सड़क पर मौजूद पुलिस, बल्कि कैमरों के जरिए भी नंबर प्लेट ट्रेस कर ई-चालान सीधे घर भेजे जा रहे हैं।
- स्पॉट फाइन: जो लोग मौके पर पकड़े जा रहे हैं, उन पर भारी जुर्माना लगाया जा रहा है और कुछ मामलों में लाइसेंस निरस्त करने की चेतावनी भी दी जा रही है।
दुपहिया वाहन चालकों के तर्क बनाम नियम
कार्रवाई के दौरान कई चालकों ने अपनी दलीलें दीं। कुछ का कहना है कि मुख्य सड़क पर मेट्रो निर्माण और गड्ढों के कारण ट्रैफिक जाम रहता है, जिससे बचने के लिए वे कॉरिडोर का सहारा लेते हैं। हालाँकि, पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि “सुविधा के नाम पर नियम तोड़ना और सुरक्षा से समझौता करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
नगर निगम और एआईसीटीएसएल (AICTSL) की भूमिका
नगर निगम ने उन जगहों की पहचान शुरू कर दी है जहाँ कॉरिडोर की लोहे की ग्रिल टूटी हुई है। इन ‘लीकेज पॉइंट्स’ को वेल्डिंग कर बंद किया जा रहा है। AICTSL (अटल इंदौर सिटी ट्रांसपोर्ट सर्विसेज लिमिटेड) के अधिकारियों का कहना है कि आई-बस की औसत गति कॉरिडोर में 40-50 किमी/घंटा होती है, ऐसे में अगर अचानक कोई बाइक सामने आती है, तो बस को रोकना मुश्किल होता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
इंदौरवासियों के लिए जरूरी निर्देश
यदि आप आज या आने वाले दिनों में एलआईजी, पलासिया या भंवरकुआं की ओर जा रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- गलती से भी न घुसें: कॉरिडोर में प्रवेश ₹500 से ₹2000 तक का जुर्माना और गाड़ी ज़ब्ती का कारण बन सकता है।
- समय का ध्यान रखें: मुख्य सड़क पर ट्रैफिक दबाव को देखते हुए अपने गंतव्य के लिए 10-15 मिनट पहले निकलें।
- एम्बुलेंस और इमरजेंसी: याद रखें, कॉरिडोर केवल आई-बस और इमरजेंसी सेवाओं (एम्बुलेंस/फायर ब्रिगेड) के लिए है।
निष्कर्ष
इंदौर को स्वच्छता में नंबर-1 बनाए रखने के बाद अब प्रशासन का लक्ष्य ट्रैफिक अनुशासन में भी शहर को अग्रणी बनाना है। पुलिस की यह सख्ती केवल जुर्माना वसूलने के लिए नहीं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन को सुव्यवस्थित करने के लिए है।






