इंदौर: स्वच्छता का सिरमौर कहा जाने वाला हमारा शहर अब 2026 के सर्वेक्षण में अपना परचम लहराने के लिए कमर कस चुका है। इंदौर के खान-पान की शान और पर्यटकों के पसंदीदा केंद्र ‘छप्पन दुकान’ को इस बार एक आदर्श ‘स्मार्ट और क्लीन स्ट्रीट फूड हब’ के रूप में पेश करने की तैयारी है। इसी सिलसिले में आज इंदौर महापौर ने छप्पन दुकान एसोसिएशन के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की, जिसमें भविष्य की सख्त कार्ययोजना का खाका तैयार किया गया।
बैठक का मुख्य एजेंडा: सिंगल-यूज़ प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध
बैठक में महापौर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 की गाइडलाइंस पहले से कहीं अधिक सख्त हैं। अब केवल ऊपरी सफाई से काम नहीं चलेगा। छप्पन दुकान को ‘सिंगल-यूज़ प्लास्टिक फ्री ज़ोन’ बनाने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं।
- सख्ती: यदि किसी भी दुकान पर प्लास्टिक के चम्मच, स्ट्रॉ, या अमानक पॉलीथीन पाई जाती है, तो केवल जुर्माना नहीं लगेगा, बल्कि बार-बार उल्लंघन करने पर दुकान को ‘सील’ भी किया जा सकता है।
- विकल्प: दुकानदारों को लकड़ी के चम्मच, कागज के स्ट्रॉ और कपड़े या जूट के थैलों का उपयोग अनिवार्य करने को कहा गया है।
डस्टबिन का ‘थ्री-बिन’ मॉडल
गंदगी को स्रोत (Source) पर ही अलग करने के लिए महापौर ने हर दुकान के बाहर ‘थ्री-बिन’ (Three-Bin) सिस्टम लागू करने का निर्देश दिया है। अब ग्राहकों को कचरा डालने के लिए तीन विकल्प दिए जाएंगे:
- नीला डस्टबिन: सूखा कचरा (कागज, खाली डिब्बे)।
- हरा डस्टबिन: गीला कचरा (बचा हुआ भोजन, छिलके)।
- काला/पीला डस्टबिन: बायो-वेस्ट या सैनिटरी कचरा (टिशू पेपर आदि)।
नाइट स्वीपिंग और ड्रेनेज सिस्टम पर जोर
छप्पन दुकान पर शाम के समय भारी भीड़ होती है, जिसके कारण रात तक काफी कचरा जमा हो जाता है। महापौर ने नगर निगम की टीम को निर्देश दिया है कि रात 11 बजे के बाद विशेष ‘नाइट स्वीपिंग’ की जाए और मशीनों से फर्श की धुलाई हो। साथ ही, दुकानों के पीछे के ड्रेनेज सिस्टम की जांच की जा रही है ताकि तेल और मसालों के कारण पाइपलाइन चोक न हो। इसके लिए हर दुकान में ‘ऑयल एंड ग्रीस ट्रैप’ लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
दुकानदारों का पक्ष और एसोसिएशन की सहमति
छप्पन दुकान व्यापारी एसोसिएशन के अध्यक्ष ने प्रशासन को आश्वासन दिया है कि सभी दुकानदार स्वच्छता के इस महाकुंभ में साथ हैं। उन्होंने मांग की है कि नगर निगम भी डस्टबिन को समय पर खाली करने की व्यवस्था को और बेहतर बनाए। व्यापारियों ने सुझाव दिया है कि छप्पन दुकान के प्रवेश द्वारों पर ‘डिजिटल स्वच्छता बोर्ड’ लगाए जाएं, जो आने वाले पर्यटकों को कचरा न फैलाने के लिए प्रेरित करें।
इंदौरवासियों और पर्यटकों के लिए नई गाइडलाइन
नगर निगम अब दुकानदारों के साथ-साथ ग्राहकों पर भी नजर रखेगा।
- ऑन-द-स्पॉट फाइन: यदि कोई पर्यटक सड़क पर टिशू पेपर या दोना फेंकता पाया जाता है, तो नगर निगम के ‘यलो मार्शल’ मौके पर ही चालान काटेंगे।
- सेल्फी पॉइंट: स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए छप्पन दुकान पर नए सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे, जिन पर स्वच्छता का संदेश होगा।
स्वच्छता सर्वेक्षण 2026 का लक्ष्य
इंदौर अब तक सात बार देश का सबसे स्वच्छ शहर बन चुका है। 2026 के लिए नगर निगम का लक्ष्य केवल शहर को साफ रखना नहीं, बल्कि ‘जीरो वेस्ट सिटी’ बनाना है। छप्पन दुकान इस अभियान का ‘चेहरा’ होगा, क्योंकि यहाँ न केवल स्थानीय लोग बल्कि विदेशी सैलानी भी आते हैं। यहाँ की स्वच्छता सीधे तौर पर इंदौर की अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग से जुड़ी है।
निष्कर्ष
छप्पन दुकान केवल एक बाजार नहीं, बल्कि इंदौर की संस्कृति है। महापौर की आज की बैठक ने यह साफ कर दिया है कि स्वच्छता के मामले में अब कोई समझौता नहीं होगा। प्रशासन और व्यापारियों के बीच का यह तालमेल इंदौर को स्वच्छता में आठवीं बार नंबर-1 बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।






