इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने एक मास्टर प्लान पर काम शुरू कर दिया है। इंदौर-देवास बायपास पर वाहनों के भारी दबाव और आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं को देखते हुए 1800 करोड़ रुपये की लागत से ‘वेस्टर्न रिंग रोड’ और बायपास सुदृढ़ीकरण परियोजना का काम आज से धरातल पर शुरू हो गया है। यह प्रोजेक्ट न केवल इंदौर बल्कि पीथमपुर और देवास के औद्योगिक क्षेत्रों के लिए भी ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।
क्या है 1800 करोड़ का मास्टर प्लान?
इस वृहद परियोजना को दो मुख्य चरणों में विभाजित किया गया है:
- मौजूदा बायपास का अपग्रेडेशन: इंदौर-देवास बायपास के सर्विस रोड को चौड़ा करना और प्रमुख चौराहों (जैसे राऊ, कनाड़िया और अर्जुन बड़ौदा) पर नए फ्लाईओवर्स का निर्माण।
- वेस्टर्न रिंग रोड का निर्माण: शहर के दूसरी तरफ एक नया बायपास तैयार करना, जो इंदौर-खडंवा रोड (तेजाजी नगर) से शुरू होकर पीथमपुर होते हुए इंदौर-अहमदाबाद हाईवे को जोड़ेगा।
भारी वाहनों का शहर से होगा ‘एग्जिट’
वर्तमान में, मुंबई-दिल्ली कॉरिडोर और दक्षिण भारत से आने वाले भारी ट्रक इंदौर के पूर्वी बायपास का उपयोग करते हैं। इससे शहर के भीतर का ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित होता है। 1800 करोड़ की इस नई सड़क के बन जाने से:
- ट्रकों का डायवर्जन: पीथमपुर और गुजरात की ओर जाने वाले भारी वाहन शहर की सीमा में प्रवेश किए बिना ही बाहर से निकल जाएंगे।
- समय और ईंधन की बचत: इस नए रूट से यात्रा के समय में कम से कम 45 मिनट की कमी आएगी और वाहनों के ईंधन की खपत भी घटेगी।
फ्लाईओवर और अंडरपास की कतार
परियोजना के तहत कुल 12 नए फ्लाईओवर और 15 अंडरपास बनाए जाने का प्रस्ताव है।
- राऊ जंक्शन: यहाँ एक ‘थ्री-लेयर’ (तीन स्तरीय) फ्लाइओवर बनाने की योजना है ताकि महू, पीथमपुर और इंदौर शहर की तरफ जाने वाला ट्रैफिक आपस में न टकराए।
- कनाड़िया और बिचौली मर्दाना: इन व्यस्त चौराहों पर सिक्स-लेन फ्लाईओवर बनाए जाएंगे ताकि स्थानीय ट्रैफिक बिना रुके नीचे से निकल सके।
औद्योगिक गलियारे को मिलेगी मजबूती
इंदौर का पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र भारत के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब में से एक है। 1800 करोड़ की इस सड़क परियोजना से पीथमपुर का सीधा जुड़ाव देवास और उज्जैन की ओर जाने वाले मार्गों से हो जाएगा। इससे माल ढुलाई (Logistics) की लागत कम होगी और नए उद्योगों को इंदौर की ओर आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण और तकनीक का संगम
इस सड़क के निर्माण में ‘ग्रीन हाईवे’ अवधारणा का पालन किया जा रहा है।
- सड़क के दोनों ओर लगभग 50,000 छायादार पौधे लगाए जाएंगे।
- रात के समय बेहतर दृश्यता के लिए पूरी सड़क पर ‘स्मार्ट सेंसर-आधारित’ एलईडी लाइट्स लगाई जाएंगी।
- जल निकासी के लिए आधुनिक सीवेज सिस्टम बनाया जाएगा ताकि बारिश के दौरान सड़क पर पानी जमा न हो।
निर्माण की समय सीमा और चुनौतियां
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और लोक निर्माण विभाग (PWD) ने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 30 महीने का लक्ष्य रखा है। सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में निर्माण कार्य के दौरान ट्रैफिक को सुचारू रखना है। प्रशासन ने इसके लिए वैकल्पिक मार्ग (Diversion Routes) पहले ही तैयार कर लिए हैं।
निष्कर्ष
1800 करोड़ की यह ‘बायपास और रिंग रोड’ परियोजना इंदौर के भविष्य का आधार बनेगी। यह न केवल शहर के भीतर के प्रदूषण और शोर को कम करेगी, बल्कि इंदौर को वैश्विक स्तर के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) वाले शहरों की सूची में शामिल करेगी। अगले ढाई वर्षों में जब यह सड़क पूरी तरह बनकर तैयार होगी, तब इंदौर का सफर वाकई सुहाना होगा।






