इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में नशे के सौदागरों के खिलाफ पुलिस और एसटीएफ (STF) ने एक संयुक्त अभियान में बड़ी सफलता हासिल की है। इंदौर एसटीएफ की टीम ने घेराबंदी कर तीन शातिर नशा तस्करों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 410 ग्राम उच्च गुणवत्ता वाली स्मैक बरामद की गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस खेप की अनुमानित कीमत 41 लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही है। यह कार्रवाई शहर में युवाओं को नशे के जाल से बचाने के लिए चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत की गई है।
कैसे हुई गिरफ्तारी?
एसटीएफ को मुखबिर से सटीक सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की लग्जरी कार में मादक पदार्थों की बड़ी खेप राजस्थान सीमा से इंदौर की ओर आ रही है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने शिप्रा थाना क्षेत्र के पास रणनीतिक नाकाबंदी की।
● संदेह और तलाशी: जब संदिग्ध कार नाके पर पहुँची, तो पुलिस को देखकर चालक ने भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए गाड़ी को चारों ओर से घेर लिया। शुरुआती तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन जब कार के डैशबोर्ड और सीटों की गहन जांच की गई, तो पैकेटों में छिपाई गई स्मैक बरामद हुई।
● आरोपियों की पहचान: गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान सुनील, आकाश और राहुल के रूप में हुई है। ये तीनों इंदौर और आसपास के जिलों के रहने वाले हैं, लेकिन इनका नेटवर्क अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है।
तस्करी का तरीका और रूट
पूछताछ में यह बात सामने आई है कि यह गिरोह नशे की खेप को राजस्थान के झालावाड़ और प्रतापगढ़ इलाकों से लाता था।
● कोडवर्ड का उपयोग: आरोपी पुलिस से बचने के लिए फोन पर बातचीत के दौरान ‘सफेद पाउडर’ या ‘सामान’ जैसे कोडवर्ड का इस्तेमाल करते थे।
● इंदौर का कनेक्शन: यह खेप इंदौर के छोटे पेडलर्स (नशा बेचने वाले) को दी जानी थी, जो इसे पब, कॉलेजों और झुग्गी बस्तियों में ऊंचे दामों पर बेचते हैं।
एसटीएफ की बड़ी कामयाबी
इंदौर एसटीएफ यूनिट के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह इस साल की अब तक की सबसे बड़ी बरामदगी में से एक है।
● नेटवर्क पर प्रहार: पुलिस अब उन ‘व्हाइट कॉलर’ लोगों की तलाश कर रही है जो इन तस्करों को आर्थिक मदद देते थे और शहर में इनका संरक्षण करते थे।
● वाहन और मोबाइल जब्त: स्मैक के साथ-साथ तस्करी में इस्तेमाल की गई कार और आरोपियों के चार महंगे मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं। मोबाइल के कॉल रिकॉर्ड्स से कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
नशे की मंडी बनता इंदौर?
पिछले कुछ वर्षों में इंदौर में सिंथेटिक ड्रग्स और स्मैक की खपत में बढ़ोतरी देखी गई है। इंदौर पुलिस की ‘नशा मुक्त इंदौर’ मुहीम के तहत लगातार गिरफ्तारियां हो रही हैं, लेकिन राजस्थान और उत्तर प्रदेश से जुड़ते तारों के कारण यह चुनौती कम नहीं हो रही है।
● कड़ी कानूनी कार्रवाई: पकड़े गए तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट (NDPS Act) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी बड़ी मात्रा में नशा मिलने पर आरोपियों को कम से कम 10 से 20 साल तक की जेल हो सकती है।
पुलिस की अपील
इंदौर पुलिस कमिश्नर ने जनता से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई भी संदिग्ध व्यक्ति नशीले पदार्थों की बिक्री करता हुआ पाया जाता है, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। सूचना देने वाले का नाम पूरी तरह गुप्त रखा जाएगा।
निष्कर्ष
41 लाख रुपये की स्मैक की यह जब्ती नशे के कारोबार की कमर तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हालांकि, जब तक मांग (demand) को कम नहीं किया जाता, तब तक सप्लाई को पूरी तरह रोकना मुश्किल है। पुलिस अब उन युवाओं की भी काउंसलिंग करने की योजना बना रही है जो इन तस्करों के नियमित ग्राहक थे, ताकि उन्हें मुख्यधारा में वापस लाया जा सके।






