इंदौर: स्वच्छता में सात बार देश का सिरमौर रहने वाले इंदौर शहर के लिए भागीरथपुरा की घटना एक गहरा दाग बन गई है। पिछले तीन हफ्तों से चल रहे इस जल जनित संकट में आज एक और ई-रिक्शा चालक की मृत्यु के साथ कुल मौतों का दावा 25 तक पहुँच गया है। यह त्रासदी प्रशासन की गंभीर लापरवाही और शहरी बुनियादी ढांचे की जर्जर हालत को उजागर करती है।
ताजा घटना: एक और परिवार का सहारा छीन गया
भागीरथपुरा के निवासी 51 वर्षीय ई-रिक्शा चालक हेमंत गायकवाड़ ने मंगलवार देर रात उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। हेमंत पिछले 15 दिनों से दूषित पानी के कारण हुए संक्रमण (डायरिया) से जूझ रहे थे। वे अपने परिवार में इकलौते कमाने वाले सदस्य थे और अपने पीछे पत्नी व चार बेटियों को छोड़ गए हैं। हालांकि, सरकारी रिकॉर्ड में इस मौत को अन्य गंभीर बीमारियों (जैसे किडनी की समस्या) से जोड़कर देखा जा रहा है, लेकिन परिजनों का स्पष्ट कहना है कि हेमंत की हालत दूषित पेयजल पीने के बाद ही बिगड़ी थी।
क्या था पूरा मामला?
दिसंबर 2025 के अंतिम सप्ताह में भागीरथपुरा क्षेत्र के घरों में आने वाले पेयजल में सीवेज का गंदा पानी मिलने लगा था। जांच में सामने आया कि एक सार्वजनिक शौचालय के पास मुख्य पेयजल पाइपलाइन में बड़ा लीकेज था, जिसके कारण मल-मूत्र युक्त गंदा पानी सप्लाई में मिल गया। देखते ही देखते यह इलाका ‘ग्राउंड जीरो’ बन गया और सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त, डिहाइड्रेशन और तेज बुखार की चपेट में आ गए।
सरकारी आंकड़े बनाम जमीनी हकीकत
आंकड़ों को लेकर प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच बड़ा मतभेद है:
- स्थानीय दावा: स्थानीय निवासियों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब तक 25 लोगों की मौत हो चुकी है।
- सरकारी रिपोर्ट: प्रशासन ने शुरुआत में केवल 7 से 8 मौतों की पुष्टि की थी। बाद में डेथ ऑडिट कमेटी की जांच के बाद यह संख्या बढ़ी है।
- मुआवजा: अब तक जिला प्रशासन ने 18 से 21 परिवारों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि वितरित की है, जो इस बात का संकेत है कि मौतों का आधिकारिक आंकड़ा 8 से कहीं अधिक है।
हाईकोर्ट की सख्ती और जांच समिति
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने इस मामले में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश दिया है कि पाइपलाइन के टेंडर और जांच से जुड़े सभी मूल दस्तावेजों को सील कर सुरक्षित रखा जाए ताकि कोई छेड़छाड़ न हो सके।
राज्य सरकार ने भी अब मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित की है। यह समिति तकनीकी और प्रशासनिक विफलताओं की जांच करेगी और एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
खतरे में स्वच्छता का ‘तमगा’
इंदौर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी स्वच्छता और जल प्रबंधन के लिए सराहा जाता रहा है। लेकिन भागीरथपुरा की इस घटना ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि पाइपलाइन बदलने का काम महीनों से लंबित था और बार-बार शिकायतों के बावजूद अधिकारियों ने सुध नहीं ली।
आज भी क्षेत्र में दहशत का माहौल है और लोग सरकारी नलों का पानी पीने से कतरा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा घर-घर जाकर सर्वे और क्लोरीनीकरण (Chlorination) का काम जारी है।







