इंदौर, जो अपनी स्वच्छता के लिए देश भर में विख्यात है, हाल ही में एक दर्दनाक जल त्रासदी का केंद्र बन गया। इस संकट के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी का इंदौर दौरा राज्य की राजनीति में एक बड़ा मोड़ लेकर आया है। उनके इस दौरे ने न केवल प्रशासन की खामियों को उजागर किया, बल्कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच एक नया ‘सियासी युद्ध’ भी छेड़ दिया है।
दौरे की मुख्य वजह: भागीरथपुरा का जल संकट
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में पिछले कुछ हफ्तों से दूषित पेयजल के कारण एक गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हुआ। स्थानीय निवासियों के अनुसार, इस त्रासदी में अब तक लगभग 24 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सरकारी आंकड़े अभी भी कम संख्या (7 से 15 के बीच) बता रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर राहुल गांधी 17 से 19 जनवरी 2026 के बीच इंदौर पहुंचे।
दौरे के मुख्य बिंदु
- अस्पताल में पीड़ितों से मुलाकात: राहुल गांधी ने सबसे पहले इंदौर के बॉम्बे हॉस्पिटल का दौरा किया, जहां दूषित पानी के कारण बीमार हुए मरीजों का इलाज चल रहा है। उन्होंने मरीजों के स्वास्थ्य का हाल जाना और उनके इलाज के खर्च के बारे में जानकारी ली।
- भागीरथपुरा में पदयात्रा और सांत्वना: राहुल गांधी सीधे उस इलाके में पहुंचे जहां से मौतों की खबरें आई थीं। उन्होंने तंग गलियों में जाकर शोकाकुल परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने मृतकों के परिजनों के आंसू पोंछे और उनकी बातें सुनीं।
- आर्थिक सहायता: कांग्रेस पार्टी की ओर से राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों को 1-1 लाख रुपये के चेक वितरित किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल सहायता है, न्याय के लिए संघर्ष अभी बाकी है।
‘स्मार्ट सिटी’ मॉडल पर बड़ा हमला
राहुल गांधी ने इस त्रासदी को आधार बनाकर केंद्र और राज्य सरकार के ‘स्मार्ट सिटी’ प्रोजेक्ट पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“यह कैसा नया स्मार्ट सिटी मॉडल है? देश को स्मार्ट सिटी के सपने दिखाए गए, लेकिन आज इंदौर जैसे शहर में गरीबों को पीने का साफ पानी तक नसीब नहीं है। लोग पानी पीकर मर रहे हैं। यह सरकार की आपराधिक लापरवाही है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार मौतों के आंकड़ों को छुपाने की कोशिश कर रहे हैं और दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय लीपापोती में जुटे हैं।
सियासी घमासान: आरोप-प्रत्यारोप का दौर
राहुल गांधी के इस दौरे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है:
- भाजपा का पलटवार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने राहुल गांधी के दौरे को ‘लाशों पर राजनीति’ करार दिया। सरकार का कहना है कि वे पहले ही मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये की सहायता राशि घोषित कर चुके हैं और पाइपलाइन सुधारने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है।
- संसद में गूंजेगा मुद्दा: राहुल गांधी ने घोषणा की है कि वे इंदौर के इस जल संकट और ‘स्मार्ट सिटी की विफलता’ के मुद्दे को आगामी संसद सत्र में उठाएंगे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस नेताओं को भी इस मुद्दे पर विधानसभा में सरकार को घेरने के निर्देश दिए हैं।
- स्वच्छता की छवि पर सवाल: इंदौर जो लगातार नंबर-1 स्वच्छ शहर रहा है, वहां इस तरह की घटना होना विपक्ष के लिए एक बड़ा हथियार बन गया है। कांग्रेस इसे ‘सिस्टम की नाकामी’ बता रही है।
निष्कर्ष
राहुल गांधी का यह दौरा केवल एक शोक संवेदना का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसने मध्य प्रदेश में कांग्रेस को एक नई संजीवनी देने का काम किया है। इस दौरे के बाद अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है कि वह शहर के जल वितरण तंत्र को पूरी तरह से दुरुस्त करे ताकि ‘स्मार्ट सिटी’ का तमगा केवल कागजों तक ही सीमित न रहे।






