इंदौर। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शिक्षा केंद्रों में से एक, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV), अब अपनी पहचान “डिग्री देने वाले संस्थान” से बदलकर “स्किल-हब” के रूप में स्थापित करने जा रहा है। विश्वविद्यालय प्रबंधन ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी शैक्षणिक सत्र (2026-27) से पाठ्यक्रमों का आधार सिर्फ सैद्धांतिक शिक्षा नहीं, बल्कि ‘एंप्लॉयबिलिटी’ (रोजगार क्षमता) होगी। विश्वविद्यालय का नया मंत्र है— “वही पढ़ाएंगे, जो काम आएगा।”
विभागों का पुनर्गठन और स्वतंत्र अस्तित्व
DAVV के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई के अनुसार, विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन विषयों को अलग पहचान देने का निर्णय लिया है जिनकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है।
- नए स्वतंत्र विभाग: इतिहास, भूगोल, राजनीति विज्ञान और विशेष रूप से मनोविज्ञान (Psychology) जैसे विषयों को अब स्वतंत्र विभाग का दर्जा दिया जा रहा है।
- विभागों का विलय: जिन पारंपरिक विभागों में छात्रों की संख्या लगातार कम हो रही है और जहाँ कॅरियर के अवसर सीमित हैं, उन्हें बड़े और डिमांड वाले विभागों के साथ मर्ज (विलय) किया जाएगा। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सकेगा।
90% प्रैक्टिकल और 10% थ्योरी का फॉर्मूला
विश्वविद्यालय का पंडित दीनदयाल उपाध्याय कौशल विकास केंद्र अब 100 से ज्यादा नए शॉर्ट-टर्म कोर्स शुरू कर रहा है। इन कोर्सेज की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें 90 प्रतिशत पढ़ाई प्रैक्टिकल आधारित होगी।
- कोर्स की सूची: डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सिक्योरिटी, एडवांस एक्सेल, कस्टमर मैनेजमेंट, डेटा एनालिसिस (SPSS), और एंड्रॉइड प्रोग्रामिंग जैसे आधुनिक विषयों के साथ-साथ प्लंबिंग, फूड पैकेजिंग और इंश्योरेंस एजेंट जैसे वोकेशनल कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं।
- फीस स्ट्रक्चर: छात्रों पर आर्थिक बोझ न पड़े, इसके लिए इन कोर्सेज की फीस ₹100 से लेकर अधिकतम ₹3,000 तक रखी गई है।
अनिवार्य इंटर्नशिप और इंडस्ट्री पार्टनरशिप
नए ढांचे के तहत अब स्नातक (UG) के चौथे वर्ष में एक साल की अनिवार्य इंडस्ट्री इंटर्नशिप या अप्रेंटिसशिप का प्रावधान जोड़ा गया है।
- अब छात्रों को डिग्री पाने के लिए वास्तविक कार्य वातावरण में काम करना होगा।
- विषय विशेषज्ञों के रूप में उद्योगों (Industries) से जुड़े प्रोफेशनल्स को पढ़ाने के लिए बुलाया जाएगा, जिससे छात्रों को क्लासरूम में ही कॉर्पोरेट जगत का अनुभव मिल सके।
- वैल्यू-ऐडेड कोर्सेज: अब एथिक्स, एनवायर्नमेंटल स्टडीज और सॉफ्ट स्किल्स को केवल वैकल्पिक नहीं, बल्कि अनिवार्य कंपोनेंट बनाया गया है।
स्किल-बेस्ड कोडिंग और एआई का समावेश
स्मार्ट सिटी इंदौर की जरूरतों को देखते हुए DAVV ने अपने कंप्यूटर साइंस और मैनेजमेंट कोर्सेज में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और उभरती हुई तकनीकों को मुख्य पाठ्यक्रम का हिस्सा बना दिया है। डिजाइन विभाग (DAID) अब ‘ह्यूमन-सेंटर्ड डिजाइन’ और ‘प्रोडक्ट डिजाइन’ जैसे विषयों पर फोकस कर रहा है ताकि छात्र भविष्य के ‘डिजाइन लीडर्स’ बन सकें।
छात्रों और विशेषज्ञों की राय
शिक्षाविदों ने इस बदलाव का स्वागत किया है। उनका मानना है कि पारंपरिक डिग्री लेकर निकलने वाले छात्र अक्सर नौकरियों के लिए संघर्ष करते हैं क्योंकि उन्हें इंडस्ट्री की जरूरतों का पता नहीं होता। DAVV का यह ‘जॉब-ओरिएंटेड’ बदलाव छात्रों को कॉलेज से निकलते ही सीधे रोजगार के लिए तैयार (Industry-ready) करेगा।
निष्कर्ष
DAVV के ये अकादमिक सुधार इंदौर के युवाओं के लिए एक नया सवेरा लेकर आए हैं। अब छात्रों को केवल परीक्षा पास करने के लिए रटने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि वे उन कौशलों को सीखेंगे जिनकी मांग ग्लोबल मार्केट में है।







