मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर इन दिनों एक गंभीर मानवीय और स्वास्थ्य संकट से जूझ रही है। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी (Contaminated Water) पीने से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इसी संवेदनशील मुद्दे को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी आज, 17 जनवरी 2026 को इंदौर के दौरे पर हैं। उनका यह दौरा विशुद्ध रूप से उन पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने और इस प्रशासनिक विफलता को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए केंद्रित है।
भागीरथपुरा की गलियों में राहुल गांधी
राहुल गांधी सुबह इंदौर एयरपोर्ट पहुँचे, जहाँ से वे सीधे भागीरथपुरा क्षेत्र के लिए रवाना हुए। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच, उन्होंने उन तंग गलियों का दौरा किया जहाँ पिछले कुछ दिनों में हैजा और गंभीर संक्रमण के कारण 23 लोगों की जान जा चुकी है।
राहुल गांधी ने उन घरों में जाकर शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की, जिन्होंने दूषित पानी की वजह से अपने बच्चों या बुजुर्गों को खोया है। पीड़ित परिवारों ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम ने पाइपलाइनों की मरम्मत नहीं की और सीवेज का गंदा पानी पीने के पानी में मिलता रहा।
राजनीतिक सरगर्मी और आरोप-प्रत्यारोप
राहुल गांधी के इस दौरे ने मध्य प्रदेश की राजनीति में उबाल ला दिया है। कांग्रेस इसे ‘प्रशासनिक हत्या’ करार दे रही है, जबकि सत्ताधारी भाजपा इसे ‘सियासी पर्यटन’ बता रही है।
- राहुल गांधी का बयान: पीड़ितों से मिलने के बाद राहुल गांधी ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “यह केवल एक बीमारी नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की लापरवाही से हुई हत्या है। इंदौर को स्वच्छता में नंबर-1 कहा जाता है, लेकिन यहाँ की हकीकत यह है कि गरीब बस्तियों में लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। सरकार आंकड़ों को छिपा रही है।”
- सरकार का पलटवार: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राहुल के दौरे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कांग्रेस संवेदनशील मुद्दों पर ‘लाशों की राजनीति’ कर रही है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने दोषियों पर कार्रवाई शुरू कर दी है और प्रभावितों को उचित मुआवजा दिया जा रहा है।
त्रासदी का मुख्य कारण: जर्जर इंफ्रास्ट्रक्चर
भागीरथपुरा की इस त्रासदी ने इंदौर नगर निगम के दावों की पोल खोल दी है। जांच में सामने आया है कि इस क्षेत्र में 50 साल पुरानी सीमेंट की पाइपलाइनें थीं, जो कई जगहों से टूट चुकी थीं। इन टूटी हुई पाइपलाइनों में पास ही बहने वाली सीवेज लाइन का गंदा पानी रिसकर मिल रहा था।
क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि वे पिछले तीन महीनों से पानी में बदबू आने की शिकायत कर रहे थे, लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
हाईकोर्ट की सक्रियता और प्रशासन पर दबाव
राहुल गांधी के दौरे और जनता के गुस्से के बीच, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने भी इस मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इंदौर नगर निगम कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग को फटकार लगाते हुए पूछा है कि इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई?
राहुल गांधी ने भी मांग की है कि:
- प्रत्येक मृतक के परिवार को ₹50 लाख का मुआवजा दिया जाए।
- दोषी अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा (304-ए) दर्ज किया जाए।
- इंदौर की सभी पुरानी बस्तियों में पाइपलाइनों का तत्काल ‘वाटर ऑडिट’ कराया जाए।
निष्कर्ष
राहुल गांधी का इंदौर दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह देश के सबसे स्वच्छ शहर के भीतर छिपे उन अंधेरे कोनों को उजागर करता है जहाँ बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। भागीरथपुरा की यह घटना हमें याद दिलाती है कि ‘स्मार्ट सिटी’ का सपना तब तक अधूरा है जब तक कि हर नागरिक को शुद्ध पेयजल जैसा मौलिक अधिकार सुनिश्चित न हो जाए।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक गूंजने की उम्मीद है, जिससे राज्य सरकार पर न केवल दोषियों को सजा देने का दबाव बढ़ेगा, बल्कि शहर के पूरे ड्रेनेज और वॉटर सप्लाई सिस्टम को बदलने की चुनौती भी सामने होगी।







