IIT इंदौर का क्रांतिकारी आविष्कार: अब आपके पसीने से चार्ज होगी स्मार्टवॉच
तकनीकी दुनिया में आए दिन नए चमत्कार होते रहते हैं, लेकिन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी तकनीक विकसित की है जो न केवल भविष्यवादी है, बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी है। IIT इंदौर के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा ‘स्मार्ट फैब्रिक’ और ‘नैनो-जेनरेटर’ तैयार किया है जो इंसान के शरीर से निकलने वाले पसीने (Sweat) और वातावरण की नमी का उपयोग करके बिजली पैदा कर सकता है। यह बिजली इतनी पर्याप्त है कि इससे आपकी स्मार्टवॉच, फिटनेस बैंड या अन्य छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को आसानी से चार्ज किया जा सकता है।
तकनीक के पीछे का विज्ञान
इस शोध का नेतृत्व IIT इंदौर के भौतिकी और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसरों और पीएचडी छात्रों की एक टीम ने किया है। इस तकनीक के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- ट्रांसपिरेशन-आधारित ऊर्जा: जिस तरह पेड़ों की पत्तियां पानी का वाष्पीकरण (Transpiration) करती हैं, ठीक उसी तरह यह डिवाइस काम करता है। इसमें इस्तेमाल किया गया विशेष मैटेरियल पसीने में मौजूद आयनों (Ions) को गतिमान कर देता है, जिससे विद्युत प्रवाह उत्पन्न होता है।
- नैनो-जनरेटर (TENG): शोधकर्ताओं ने ट्राइबोइलेक्ट्रिक नैनो-जेनरेटर का उन्नत संस्करण तैयार किया है। यह शरीर की हलचल और पसीने के रासायनिक गुणों को मिलाकर ऊर्जा पैदा करता है।
- लचीला और पहनने योग्य: यह डिवाइस पूरी तरह से लचीला है। इसे कपड़ों के भीतर फिट किया जा सकता है या एक छोटे पैच की तरह त्वचा पर लगाया जा सकता है।
स्मार्टवॉच यूजर्स के लिए बड़ी राहत
आजकल के दौर में स्मार्टवॉच और फिटनेस ट्रैकर्स हमारी जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन इनकी सबसे बड़ी समस्या बैटरी लाइफ है। भारी उपयोग के कारण इन्हें लगभग हर दिन चार्ज करना पड़ता है। IIT इंदौर की यह खोज इस समस्या का स्थायी समाधान दे सकती है:
- वर्कआउट के दौरान चार्जिंग: जब आप जिम में पसीना बहा रहे होंगे या दौड़ रहे होंगे, तो निकलने वाला पसीना आपके डिवाइस के लिए ‘ईंधन’ का काम करेगा।
- बैटरी की जरूरत होगी कम: इस तकनीक के साथ भविष्य की स्मार्टवॉच में बड़ी बैटरी की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे वे और भी हल्की और स्लिम हो सकेंगी।
- इमरजेंसी पावर: अगर आप ऐसी जगह हैं जहां बिजली नहीं है, तो आपकी शारीरिक गतिविधि ही बिजली का स्रोत बन जाएगी।
स्वास्थ्य देखभाल (Healthcare) में क्रांति
यह खोज केवल गैजेट्स तक सीमित नहीं है। इसका सबसे बड़ा लाभ मेडिकल सेक्टर में मिल सकता है:
- पेसमेकर और सेंसर: दिल की धड़कन मापने वाले उपकरणों या इंसुलिन पंपों को चार्ज करने के लिए बार-बार सर्जरी या बाहरी चार्जिंग की जरूरत कम हो जाएगी।
- रिमोट मॉनिटरिंग: दूरदराज के इलाकों में रहने वाले मरीजों के हेल्थ पैच खुद-ब-खुद पसीने से ऊर्जा लेकर डेटा अस्पताल तक भेज सकेंगे।
‘मेक इन इंडिया’ की दिशा में बड़ा कदम
IIT इंदौर का यह शोध न केवल विज्ञान की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारत को पहनने योग्य तकनीक (Wearable Tech) के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है। वर्तमान में ऐसी अधिकांश तकनीकें विदेशों से आयात की जाती हैं। यदि यह तकनीक बड़े पैमाने पर उत्पादन (Mass Production) के चरण में पहुंचती है, तो भारत ग्लोबल टेक मार्केट में एक लीडर बनकर उभर सकता है।
शोध टीम अब इस डिवाइस की ऊर्जा दक्षता (Efficiency) को और बढ़ाने और इसे व्यावसायिक रूप से किफायती बनाने पर काम कर रही है। उम्मीद की जा रही है कि अगले कुछ वर्षों में ऐसी स्मार्टवॉच बाजार में उपलब्ध होंगी जिनमें ‘चार्जिंग पोर्ट’ की जरूरत ही नहीं होगी।






