इंदौर की पूर्व सांसद और लोकसभा की पूर्व अध्यक्ष सुमित्रा महाजन (ताई) अपने बेबाक अंदाज और सिद्धांतों के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्होंने वाराणसी के मणिकर्णिका घाट पर चल रहे निर्माण कार्यों और वहां लोकमाता अहिल्याबाई होलकर द्वारा निर्मित धरोहरों के साथ छेड़छाड़ को लेकर अपनी ही पार्टी (भाजपा) की सरकार और प्रशासन को आड़े हाथों लिया है। इस खबर ने इंदौर से लेकर दिल्ली और वाराणसी तक हलचल पैदा कर दी है।
विवाद की जड़: मणिकर्णिका घाट पर मलबे का ढेर
वाराणसी में ‘काशी विश्वनाथ कॉरिडोर’ के विस्तार के दूसरे चरण का काम चल रहा है। इस परियोजना के तहत मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण और पुनरुद्धार के लिए भारी मशीनरी (JCB) का उपयोग किया जा रहा है। सुमित्रा महाजन की नाराजगी का मुख्य कारण यह है कि जिस स्थान पर अहिल्याबाई होलकर द्वारा बनवाए गए घाट और मंदिर स्थित हैं, वहां बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है और मशीनों के उपयोग से प्राचीन संरचनाओं को खतरा पैदा हो गया है।
सुमित्रा महाजन के मुख्य आक्षेप
ताई ने इस मुद्दे पर अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं:
- संवेदनशीलता का अभाव: ताई ने कहा कि “विकास के नाम पर विरासत की बलि नहीं दी जा सकती।” उन्होंने नाराजगी जताई कि मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई द्वारा निर्मित ऐतिहासिक सीढ़ियों और मंदिरों के पास जिस तरह से काम हो रहा है, वह बेहद संवेदनहीन है।
- अधिकारियों की मनमानी: उन्होंने सीधे तौर पर वाराणसी के स्थानीय प्रशासन और प्रोजेक्ट इंजीनियरों को निशाने पर लिया। उनका कहना है कि अधिकारी फाइलों में काम देख रहे हैं, लेकिन उन्हें इस बात का एहसास नहीं है कि वे किन ऐतिहासिक रत्नों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
- अहिल्याबाई का योगदान: सुमित्रा महाजन ने याद दिलाया कि जब औरंगजेब के समय मंदिर ध्वस्त किए गए थे, तब अहिल्याबाई होलकर ने ही पूरे देश में मंदिरों और घाटों का जीर्णोद्धार कराया था। उनके द्वारा बनाई गई संरचनाएं केवल पत्थर नहीं, बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था और त्याग का प्रतीक हैं।
इंदौर और काशी का अटूट संबंध
इंदौर की जनता के लिए अहिल्याबाई केवल एक रानी नहीं, बल्कि ‘मां’ समान हैं। काशी विश्वनाथ मंदिर का वर्तमान स्वरूप भी अहिल्याबाई की ही देन है। इसलिए जब भी काशी में होलकर विरासत पर कोई आंच आती है, तो इंदौर में उसकी तीखी प्रतिक्रिया होती है। ताई का बयान इसी जनभावना का प्रतिबिंब है।
सरकार का बचाव और सफाई
सुमित्रा महाजन के कड़े रुख के बाद वाराणसी प्रशासन और उत्तर प्रदेश सरकार हरकत में आई। अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि:
- किसी भी प्राचीन मंदिर को तोड़ा नहीं जा रहा है।
- निर्माण कार्य केवल आधुनिक सुविधाओं और यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।
- मलबे को हटाने के लिए वैकल्पिक रास्तों का उपयोग किया जाएगा ताकि विरासत सुरक्षित रहे।
निष्कर्ष: विरासत बनाम विकास
यह मामला एक पुरानी बहस को फिर से जिंदा करता है— विरासत बनाम विकास। सुमित्रा महाजन का यह हस्तक्षेप एक “वेक-अप कॉल” (चेतावनी) की तरह है। उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट (काशी कॉरिडोर) सराहनीय है, लेकिन नीचे स्तर के अधिकारियों की लापरवाही इस भव्यता पर दाग लगा सकती है।
ताई के इस कदम की विपक्षी दलों ने भी सराहना की है, जबकि भाजपा के भीतर इसे ‘आत्म-सुधार’ की दृष्टि से देखा जा रहा है। इंदौर के होलकर प्रेमी अब मांग कर रहे हैं कि एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाए जो यह सुनिश्चित करे कि काशी के पुनर्विकास में अहिल्याबाई की मूल स्थापत्य कला को कोई नुकसान न पहुंचे।







