इंदौर। मध्य प्रदेश सरकार के कद्दावर मंत्री और इंदौर-1 से विधायक कैलाश विजयवर्गीय के अचानक 10 दिनों के अवकाश पर चले जाने से इंदौर की राजनीति में उबाल आ गया है। यह अवकाश ऐसे समय में लिया गया है जब उनका अपना निर्वाचन क्षेत्र ‘भागीरथपुरा’ दूषित पानी के कारण मौतों के मातम में डूबा है और पड़ोसी जिले धार (भोजशाला) में वसंत पंचमी को लेकर सुरक्षा व्यवस्था बेहद संवेदनशील है।
अवकाश की आधिकारिक वजह और बवाल
मंत्री विजयवर्गीय के कार्यालय से जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, उन्होंने परिवार के एक करीबी सदस्य के निधन के कारण व्यक्तिगत अवकाश लिया है। इस दौरान वे सभी सरकारी, सार्वजनिक और सामाजिक कार्यक्रमों से दूर रहेंगे।
- गणतंत्र दिवस का बहिष्कार? इस अवकाश के कारण विजयवर्गीय 26 जनवरी 2026 को अपने प्रभार वाले जिलों (धार और सतना) में ध्वजारोहण के लिए भी उपलब्ध नहीं रहेंगे। सामान्य प्रशासन विभाग की नई सूची के अनुसार, अब इन जिलों में कलेक्टर तिरंगा फहराएंगे।
दूषित पानी मामला और ‘घंटा’ विवाद की पृष्ठभूमि
इंदौर में ‘भागीरथपुरा जलकांड’ में मौतों का आंकड़ा बढ़ने के बाद से ही विजयवर्गीय विपक्ष और जनता के निशाने पर थे।
- विवादास्पद बयान: कुछ दिन पहले जब पत्रकारों ने दूषित पानी से हुई मौतों और इलाज के खर्च पर सवाल पूछा था, तो मंत्री ने कथित तौर पर ‘अमर्यादित’ शब्द का प्रयोग किया था, जिसे लेकर कांग्रेस ने पूरे शहर में ‘घंटा बजाओ’ आंदोलन किया था।
- जवाबदेही का सवाल: विपक्ष का आरोप है कि जब शहर को अपने सबसे वरिष्ठ नेता की सबसे ज्यादा जरूरत थी, तब वे ‘शोक’ का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच रहे हैं।
विपक्ष का हमला: “मैदान छोड़कर भागना कायरता”
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस अवकाश को ‘राजनीतिक पलायन’ करार दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि:
- भागीरथपुरा में अब भी लोग बीमार हैं और पाइपलाइन सुधार का काम अधूरा है।
- धार भोजशाला में वसंत पंचमी पर नमाज और पूजा को लेकर तनाव की स्थिति है, जहाँ के वे प्रभारी मंत्री हैं।
- ऐसे संवेदनशील समय में मंत्री का अनुपस्थित रहना प्रशासनिक शून्यता पैदा करता है।
प्रशासन और भाजपा का बचाव
भाजपा और मंत्री के समर्थकों का कहना है कि परिवार में मृत्यु एक बेहद संवेदनशील और व्यक्तिगत मामला है, जिस पर राजनीति करना निम्न स्तर की मानसिकता है। प्रशासन का कहना है कि मंत्री की अनुपस्थिति से राहत कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा क्योंकि मुख्यमंत्री मोहन यादव स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और स्थानीय अधिकारी मुस्तैद हैं।
इंदौर की जनता पर क्या होगा असर?
इंदौर के नागरिक इस समय दोहरी मार झेल रहे हैं। एक तरफ दूषित पानी का डर है और दूसरी तरफ शहर के सबसे प्रभावशाली मंत्री की गैर-मौजूदगी।
- सरकारी काम में देरी: मंत्री के स्तर पर होने वाले कई महत्वपूर्ण निर्णय और फाइलें अब 10 दिनों तक अटकी रहेंगी।
- भोजशाला सुरक्षा: धार में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अब सीधे तौर पर गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय (PHQ) को जिम्मेदारी संभालनी होगी, जो पहले विजयवर्गीय की देखरेख में थी।
निष्कर्ष
कैलाश विजयवर्गीय का यह अवकाश उनके राजनीतिक जीवन के सबसे चुनौतीपूर्ण समय में आया है। एक तरफ पारिवारिक शोक की संवेदना है, तो दूसरी तरफ ‘जनसेवक’ के रूप में उनकी जवाबदेही पर उठते सवाल। अब देखना यह है कि 10 दिनों के बाद जब वे लौटेंगे, तो शहर की बिगड़ी व्यवस्थाओं और विपक्ष के तीखे सवालों का सामना कैसे करेंगे।






